हरि व्यापक सर्वत्र समाना, प्रेम ते प्रगट होहिं जे जाना’

बस्ती । सृष्टि में जब-जब अन्याय, पापाचार बढता है परमात्मा विविध रूपों में अवतार लेते हैं।  सांसारिक विष जब भी जलाने का प्रयास करें तो रामनाम को जप करना चाहिये। भारत कर्म भूमि है इस कर्म भूमि में जैसा कर्म करते है वैसा फल मिलता है। यह सद् विचार आचार्य शान्तनु जी महाराज ने दिव्य प्रेम सेवा मिशन के सेवा प्रकल्पों को समर्पित श्रीराम कथा केे तीसरे दिन व्यास पीठ से व्यक्त किया। कथा पाण्डाल में जब श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न का जन्म हुआ तो हर तरफ उल्लास का वातावरण था। 
प्रेम की व्याख्या करते हुये कहा कि आचार्य शान्तनु ने कहा ‘ हरि व्यापक सर्वत्र समाना, प्रेम ते प्रगट होहिं जे जाना। भगवान शंकर ने देखा कि जब पृथ्वी पर पापाचार, दुराचार बढ गया तो पृथ्वी ने भगवान शंकर से प्रार्थना किया तो भोलेनाथ ने कहा प्रभु हर कण में व्याप्त हैं, वेे प्रेम से ही प्रकट होेंगे और पृथ्वी के कल्याण का मार्ग प्रशस्त होंगे। प्रेम से  भगवद् प्राप्ति हो सकती है। मिलहि न रघुपति बिनु अनुरागा। किये कोटि जग जोग विरागा।। 
कथा को विस्तार देेते हुये महात्मा जी ने कहा कि  जप, तप, त्याग के स्थान पर कलिकाल में जो मनुष्य मेरा नाम प्रेम से या शत्रुतापूर्वक या किसी भाव से लेगा उसका  कल्याण ईश्वर करेंगे। उन्होने राम जन्म के हेतु पर प्रकाश डाला-‘ राम जन्म के हेतु अनेका, पृथ्वी पर प्रभु श्रीराम के अवतार लेने के अनेकों कारण हैं, उन्होने मानव कल्याण के लिये समाज में आदर्श उपस्थित किया। 
श्रीराम कथा के आरम्भ में दिव्य प्रेम सेवा मिशन के अभय पाल ने प्रकल्पों के सेवा के बारे में प्रकाश डाला।  मुख्य यजमान ओम प्रकाश सिंह, डा. के.पी. सिंह ने विधि विधान से पूजन अर्चन किया।  मुख्य रूप से   मंत्री डा. महेन्द्र प्रताप सिंह, डा. नागरदास मिश्र, राजमणि पाण्डेय, श्रद्धेय पाल, राकेश मौर्या, अवनीश शुक्ल, हरीश सिंह, गजेन्द्र सिंह, सन्तोष सिंह, यशकान्त सिंह,  विजय लक्ष्मी सिंह, नेहा सिंह, उर्मिला पाण्डेय, इन्द्रावती, रम्भा सिंह, बबिता, टिकंू सिंह, उत्कर्ष शुक्ल, राहुल, भक्ति नरायन  के साथ ही अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।